Bangladesh Violence: हिंदू युवक की भीड़ द्वारा हत्या, शव जलाया गया, यूनुस सरकार ने की निंदा
बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले में इस्लाम के अपमान के आरोप में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इतना ही नहीं बल्कि उसको पेड़ से लटका कर आग लगा दी। इस समय बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है और वहां की यूनुस सरकार खोखला दिलासा दे रही है। आइये जानते है पूरी खबर -
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में भारत विरोधी प्रदर्शनों के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा एक बार फिर सामने आई है। मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला इलाके में एक युवा हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय दीपु चंद्र दास के रूप में हुई है। आरोप है कि भीड़ ने हत्या के बाद शव को आग के हवाले भी कर दिया।
इस्लाम के अपमान के आरोप में भीड़ ने ली जान
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना गुरुवार रात की है। बंगाली मीडिया आउटलेट बार्ता बाजार ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि दीपु चंद्र दास पर एक फैक्ट्री कार्यक्रम के दौरान इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था। यह कार्यक्रम वर्ल्ड अरबी लैंग्वेज डे के अवसर पर आयोजित किया गया था।
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समान शिक्षा
समान कर संहिता
समान दंड संहिता
समान न्याय संहिता
समान पुलिस संहिता
समान नागरिक संहिता
समान धर्मस्थल संहिता
समान जनसंख्या संहिता
समान प्रशासनिक संहिता pic.twitter.com/no9qu7G52T— Ashwini Upadhyay (@AshwiniUpadhyay) December 19, 2025
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आरोप लगते ही गुस्साई भीड़ ने दीपु को घेर लिया और बेरहमी से पीटते हुए उसकी जान ले ली। इसके बाद शव को जला दिया गया जिससे घटना की भयावहता और बढ़ गई।
प्रशासन ने मौत की पुष्टि, अधजला शव पुलिस हिरासत में
भालुका उपजिला के कार्यकारी अधिकारी एमडी फिरोज हुसैन ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि एक व्यक्ति की पैगंबर के अपमान के आरोप में हत्या हुई है। उन्होंने बताया कि मृतक का शव फिलहाल पुलिस के कब्जे में है और मामले की जांच जारी है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि हालात को नियंत्रित करने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा के बीच हुई वारदात
यह हत्या ऐसे समय पर हुई है जब बांग्लादेश में जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन और आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं। इन्हीं प्रदर्शनों के बीच अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाएं बढ़ने की बात कही जा रही है।
न ये हराम है न वो हराम है
जिसके नाम पे हो हत्या वो नाम हराम है ✍️
जिस BSD वाले को बुरा लगे वो जाकर अपनी गांव मराये, क्या घिनौनी सोच है हर बात पर वही शब्द बोलकर हत्या…..
मैं आपसे पूछता हूँ दुनिया की सबसे ज़्यादा हत्याएँ कौन से शब्द बोलकर की जाती हैं ?
कमेंट में बताएं….. pic.twitter.com/gHdpIF4fjH
— Deepak Sharma (@SonOfBharat7) December 19, 2025
यूनुस सरकार ने की निंदा, दोषियों को न बख्शने का दावा
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। सरकार ने बयान जारी कर कहा कि नए बांग्लादेश में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है और इस जघन्य अपराध में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
सरकारी बयान में कहा गया कि इस नाजुक समय में हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि शहीद हादी के सम्मान में हिंसा, उकसावे और नफरत को खारिज करें और उसका विरोध करें।
विपक्ष का हमला, कट्टरपंथ बढ़ने का आरोप
इस घटना पर बांग्लादेश के पूर्व सूचना मंत्री और अवामी लीग नेता मोहम्मद अली आराफात ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में देश तेजी से कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा है। उनके मुताबिक मौजूदा हालात बांग्लादेश की सामाजिक संरचना के लिए खतरनाक संकेत हैं।
भारत ने जताई चिंता, बांग्लादेशी उच्चायुक्त तलब
इससे पहले बुधवार को भारत सरकार ने बांग्लादेश में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। विदेश मंत्रालय ने भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब कर नई दिल्ली की गंभीर चिंताओं से अवगत कराया।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यूनुस सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं समेत अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।
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