Bangladesh Violence: छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका में हिंसा, अख़बार दफ्तरों को बनाया निशाना
Bangladesh Violence: बांग्लादेश में हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब छात्र आंदोलन के वरिष्ठ नेता शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत हो गई। ढाका में हिंसक प्रदर्शन किया गया है और वहां मौजूद मीडिया दफ्तरों पर हमले किये गए है। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार यूनुस की तरफ से न्याय का भरोसा दिया गया है। पढ़िए पूरी खबर की आखिर क्यों हुई ये हिंसा -
Bangladesh Violence: बांग्लादेश एक बार फिर अशांत दौर में प्रवेश करता दिख रहा है। 2024 के छात्र आंदोलन से उभरे वरिष्ठ नेता और इंक़िलाब मंचा के प्रमुख प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हालात बेकाबू हो गए हैं। ढाका में चुनावी अभियान के दौरान गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हुए हादी को बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था जहां गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।
शरीफ उस्मान हादी की मौत से भड़का गुस्सा
हादी की मौत की पुष्टि होते ही राजधानी ढाका समेत कई शहरों में गुस्से की लहर दौड़ गई। छात्र संगठनों और आम लोगों के लिए हादी सिर्फ एक नेता नहीं थे बल्कि 2024 के विद्रोह की पहचान माने जाते थे। उनकी मौत ने आंदोलन से जुड़े तबके में गहरी बेचैनी और आक्रोश पैदा कर दिया है।
यूनुस का राष्ट्र के नाम संबोधन
देश को संबोधित करते हुए मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने बेहद भावुक लहजे में हादी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जुलाई विद्रोह का एक निडर चेहरा अब देश के बीच नहीं रहा। यूनुस ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया और भरोसा दिलाया कि गोलीबारी के दोषियों को पकड़कर सख्त सजा दी जाएगी। साथ ही उन्होंने जनता से संयम बरतने की अपील की, लेकिन सड़कों पर दिख रहा गुस्सा सरकार के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है।
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ढाका में अख़बार दफ्तरों पर हमला
जानकारी के अनुसार हादी की मौत के बाद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा गया कि गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ढाका में देश के प्रतिष्ठित अख़बार डेली प्रोथोम आलो और डेली स्टार के दफ्तरों में तोड़फोड़ की और आगजनी की। इन इमारतों में मौजूद पत्रकारों और कर्मचारियों ने हालात की जानकारी खुद साझा की और हिंसा रोकने की गुहार लगाई।
मीडिया संस्थानों पर हुए इन हमलों ने बांग्लादेश में प्रेस की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यह गुस्सा सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं है बल्कि देश में लंबे समय से जमा असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है।
शेख हसीना के मुद्दे से जुड़ता आक्रोश
स्थिति इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गई है क्योंकि यह उथल-पुथल उस दौर में हो रही है जब अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में निर्वासन में हैं। हाल के दिनों में कई प्रदर्शनकारी भारतीय उच्चायोग और वीज़ा केंद्रों तक पहुंच चुके हैं। उनकी मांग है कि शेख हसीना को बांग्लादेश वापस लाया जाए। ऐसे माहौल में शरीफ उस्मान हादी की मौत ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
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