पुतिन का महा-ऐक्शन! रूस में WhatsApp और YouTube समेत सभी अमेरिकी ऐप्स बैन, क्या अब शुरू होगा ‘डिजिटल वर्ल्ड वार’?
रूस ने अमेरिका को बड़ा झटका देते हुए WhatsApp, YouTube और Facebook समेत तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। पुतिन सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अब देश में केवल स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को ही बढ़ावा देने का फैसला किया है।
- डिजिटल ब्लैकआउट का ऐलान
- अमेरिकी ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध
- स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर जोर
- ग्लोबल मीडिया की नो-एंट्री
मास्को / न्यूज़ डेस्क: क्रेमलिन की दीवारों के पीछे से निकले एक आदेश ने आज पूरी दुनिया के टेक-कॉरिडोर में हड़कंप मचा दिया है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’ कहा जा रहा है। रूस ने अमेरिकी दबदबे को सीधी चुनौती देते हुए WhatsApp, YouTube, Instagram और Facebook समेत तमाम प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है।
यह कार्रवाई केवल एक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि रूस द्वारा अपने इंटरनेट स्पेस की ‘किलेबंदी’ है। कल तक जिस Telegram को रूसी संचार की लाइफलाइन माना जा रहा था, उस पर भी शिकंजा कसने के बाद अब YouTube और WhatsApp जैसे ग्लोबल दिग्गजों का नंबर आया है।
स्वदेशी ‘संप्रभु इंटरनेट’ की ओर रूस
रूस की रेगुलेटरी बॉडी Roskomnadzor ने साफ कर दिया है कि यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। रूस अब अपने नागरिकों को पश्चिमी नैरेटिव से दूर कर अपने ‘स्वदेशी सरकारी प्लेटफॉर्म्स’ की ओर धकेल रहा है। तकनीकी भाषा में कहें तो, इन वेबसाइटों के डोमेन नामों को रूस के ‘नेशनल डोमेन नेम सिस्टम’ (DNS) से पूरी तरह डिलीट कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि रूसी सीमा के भीतर अब ये यूआरएल सिर्फ ‘एरर’ दिखाएंगे।
सिर्फ सोशल मीडिया ही नहीं, सूचनाओं पर भी पहरा
पुतिन सरकार का यह प्रहार सिर्फ चैटिंग ऐप्स तक सीमित नहीं है। सूचनाओं के प्रवाह को रोकने के लिए BBC, डॉयचे वेले (DW), रेडियो फ्री यूरोप और रेडियो लिबर्टी जैसे वैश्विक मीडिया घरानों की वेबसाइटों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यहाँ तक कि डार्क वेब तक पहुँच आसान बनाने वाले ‘Tor Browser’ को भी ब्लॉक कर दिया गया है, ताकि कोई भी यूजर सेंसरशिप को बायपास न कर सके।
जानकारों का मानना है कि रूस अब चीन की तर्ज पर अपनी ‘ग्रेट फायरवॉल’ खड़ी कर रहा है, जहाँ बाहरी दुनिया की सूचनाएं सरकार की मर्जी के बिना अंदर दाखिल नहीं हो पाएंगी।
इस श्रेणी की और खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें: दुनिया



