Trump-Netanyahu Meeting: ईरान पर ‘महायुद्ध’ या ‘महाडील’? ट्रंप के व्हाइट हाउस में नेतन्याहू की एंट्री, बदल जाएगी पूरी रणनीति!

व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात मिडिल ईस्ट के भविष्य के लिए निर्णायक है। इजरायल चाहता है कि अमेरिका, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर सख्त पाबंदी लगाए। क्या ट्रंप की 'आयरन फिस्ट' कूटनीति ईरान को झुकने पर मजबूर करेगी? पढ़िए पूरी इनसाइड रिपोर्ट।

वॉशिंगटन/यरूशलेम: सफेद घर (White House) की ओवल ऑफिस वाली मेज एक बार फिर दुनिया के दो सबसे प्रभावशाली और आक्रामक नेताओं की गवाह बनने जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बुधवार को आमने-सामने होंगे। यह मुलाकात महज एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि ईरान के खिलाफ एक ‘नया ब्लूप्रिंट’ तैयार करने की कोशिश है।

ईरान पर ‘नो-कॉम्प्रोमाइज’ मोड में नेतन्याहू पिछले 13 महीनों में यह उनकी सातवीं मुलाकात है, लेकिन इस बार का एजेंडा बेहद गंभीर है। सूत्र बताते हैं कि नेतन्याहू इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में चल रही बातचीत कहीं सिर्फ ‘न्यूक्लियर डील’ तक सीमित न रह जाए। नेतन्याहू का स्पष्ट रुख है कि यदि ईरान के ‘मिसाइल प्रोग्राम’ और उसके ‘प्रॉक्सि वारियर्स’ (हमास-हिजबुल्ला) पर लगाम नहीं कसी गई, तो कोई भी समझौता बेकार है।

नेतन्याहू ने उड़ान भरने से पहले पत्रकारों से साफ कहा, “मैं राष्ट्रपति के सामने अपनी धारणाएं और बातचीत के बुनियादी सिद्धांत रखूंगा।” यानी, इजरायल अब पर्दे के पीछे रहकर नहीं, बल्कि फ्रंट-सीट पर बैठकर डील की शर्तें तय करना चाहता है।

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ट्रंप की ‘हार्ड लाइन’ और दोहरे संकेत डोनाल्ड ट्रंप का मिजाज हमेशा की तरह अनिश्चित और सख्त है। उन्होंने हाल ही में ‘फॉक्स बिजनेस’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ कोई भी डील तभी होगी जब उसमें “न परमाणु हथियार होंगे और न ही मिसाइलें।” ट्रंप सिर्फ बातों तक सीमित नहीं हैं; उन्होंने ईरान के पास दूसरे विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) भेजने के संकेत देकर यह साफ कर दिया है कि मेज पर कूटनीति है, तो समंदर में बारूद तैयार है।

गाजा और फिलिस्तीन पर पेंच भले ही ईरान मुख्य मुद्दा हो, लेकिन गाजा का जख्म इस बैठक की दूसरी बड़ी चुनौती है। ट्रंप अपने ’20-पॉइंट पीस प्लान’ को अमलीजामा पहनाना चाहते हैं, लेकिन नेतन्याहू सरकार के हालिया फैसलों ने मामला उलझा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है, “मैं विलय (Annexation) के खिलाफ हूँ।” जबकि इजरायल की कट्टरपंथी सरकार वेस्ट बैंक में पैर पसारने की तैयारी में है।

क्या है खतरा? ईरान ने पहले ही कह दिया है कि उसकी मिसाइल ताकत ‘गैर-परक्राम्य’ (Non-negotiable) है। वहीं, पिछले साल जून में हुए हवाई हमलों ने ईरान की रक्षा प्रणाली को नुकसान तो पहुँचाया था, लेकिन खबरें हैं कि तेहरान फिर से अपनी ताकत बटोर रहा है। ऐसे में यह बैठक तय करेगी कि आने वाले महीनों में मिडिल ईस्ट में शांति की कोई किरण दिखेगी या बारूद की गंध और तेज होगी।

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