अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा आरोप: इतिहास में किसी राजा ने उतने मंदिर नहीं तोड़े जितने बीजेपी ने

  • बनारस की विरासत और सियासत की तपिश
  • बीजेपी ने इतिहास के किसी भी राजा से ज्यादा मंदिर तोड़े
  • अखिलेश यादव का भुवनेश्वर से तीखा हमला
  • विरासत के नाम पर विनाश का खेल बंद हो
  • काशी का अपमान भाजपा पर भारी पड़ेगा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नई बहस छिड़ गई है और इस बार केंद्र में है धर्म की नगरी काशी। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में प्रेस से बात करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर अब तक का सबसे बड़ा और सीधा हमला बोला है। अखिलेश ने साफ़ लहजे में कहा कि इतिहास गवाह है कि किसी भी राजा ने उतने मंदिर नहीं तोड़े होंगे, जितने भाजपा ने अपनी योजनाओं के नाम पर ज़मींदोज़ कर दिए हैं।

अखिलेश का यह बयान महज़ एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि उस दर्द की गूँज है जो इन दिनों वाराणसी की गलियों और घाटों से निकलकर दिल्ली और लखनऊ तक पहुँच रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा को न तो धर्म की समझ है और न ही विरासत की कद्र। वे तो बस ज़मीन कब्जाने और मुनाफाखोरी के चक्कर में उन प्राचीन मंदिरों को भी नहीं छोड़ रहे हैं, जो हमारी आस्था का आधार रहे हैं।

मणिकर्णिका घाट पर मचे बवाल की इनसाइड स्टोरी

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में है वाराणसी का मणिकर्णिका घाट, जहाँ करीब 25 करोड़ की लागत से पुनर्विकास का काम चल रहा है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि विकास के इस शोर में काशी की सनातनी परंपरा और प्राचीन ढांचों को बेदर्दी से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा अपनों को फायदा पहुँचाने और चंदे के धंधे को चमकाने के लिए काशी की रूह के साथ खिलवाड़ कर रही है।

बनारस की तंग गलियां और वहां के छोटे-छोटे मंदिर सदियों पुराने हैं। अखिलेश का तर्क है कि यूरोप जैसे देश अपनी पुरानी इमारतों और विरासत को सहेजने के लिए जान लगा देते हैं, लेकिन यहाँ भाजपा की सरकार मॉडर्नाइजेशन के नाम पर ऐतिहासिक प्रतीकों को ही मिटा रही है। उन्होंने अयोध्या का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी जनता ने भाजपा को इसीलिए सबक सिखाया क्योंकि वहां विकास के नाम पर लोगों के जज़्बातों को कुचला गया था।

विपक्ष की एकजुटता और भाजपा की चुप्पी

यह मामला अब सिर्फ सपा बनाम भाजपा नहीं रह गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज़ बुलंद की है। उन्होंने मणिकर्णिका घाट की प्राचीनता के साथ छेड़छाड़ को ‘पाप’ करार दिया है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी काशी की सांस्कृतिक विरासत को पहुँच रहे नुकसान पर गहरी चिंता जताई है। विपक्ष का साझा सुर यही है कि धार्मिक स्थलों का व्यवसायीकरण बंद होना चाहिए।

दूसरी तरफ, भाजपा की ओर से अभी कोई बड़ा आधिकारिक बयान तो नहीं आया है, लेकिन सरकार के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह सारा काम श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। पर सवाल वही है की क्या सुविधा के नाम पर उस प्राचीनता को खो देना सही है जो बनारस को ‘अविनाशी काशी’ बनाती है? अखिलेश यादव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा भी है कि यही ‘अविनाशी काशी’ एक दिन भाजपा के राजनीतिक विनाश का कारण बनेगी।

वाराणसी के घाटों पर पत्थर टूटने की आवाज़ें अब लखनऊ और दिल्ली के सियासी गलियारों में शोर मचा रही हैं। अब देखना यह है कि आस्था और आधुनिकता की इस जंग में जीत किसकी होती है।

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