पीयूष गोयल का स्टार्टअप्स को गुरुमंत्र: रिस्क लेने से ही बनेगा विकसित भारत, स्पेस और डीप-टेक में मचेगी धूम

- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत मंडपम में युवाओं के बढ़ते आत्मविश्वास और रिस्क लेने की क्षमता को सराहा
- टूरिज्म और स्किल डेवलपमेंट में छिपी हैं अपार संभावनाएं, युवाओं को नई तकनीक सीखने पर देना होगा जोर
- स्पेस सेक्टर में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स का दबदबा, जल्द कई नए यूनिकॉर्न उभरने की उम्मीद
- स्टार्टअप्स के लिए खुले ग्लोबल मार्केट के दरवाजे, गहरी तकनीक और इनोवेशन बनेगा नए भारत की पहचान
आज का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। दिल्ली के भारत मंडपम में जब केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ‘स्टार्टअप पे चर्चा’ के दौरान युवाओं से रूबरू हुए, तो उनके शब्दों में एक बदलते हिंदुस्तान की साफ तस्वीर नजर आई। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि आज के युवा भारतीयों में जो सबसे बड़ा बदलाव दिख रहा है, वह है उनका खुद पर अटूट भरोसा। अब वे खतरा उठाने से डरते नहीं हैं, बल्कि नए आइडियाज और बिजनेस के साथ दुनिया बदलने का माद्दा रखते हैं।
गोयल का मानना है कि यह सिर्फ कोई व्यापारिक बदलाव नहीं है, बल्कि देश की सोच में आया एक बुनियादी बदलाव है। जिस तरह से हमारी नई पीढ़ी प्रयोग कर रही है और उद्यमिता के रास्ते पर चल रही है, वह दिखाता है कि भारत अब भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार है।
पर्यटन और कौशल विकास में छिपे हैं सुनहरे अवसर
बातचीत के दौरान मंत्री जी ने दो खास क्षेत्रों पर जोर दिया—पर्यटन और स्किल डेवलपमेंट। उन्होंने स्टार्टअप संस्थापकों से कहा कि इन क्षेत्रों में विकास की इतनी गुंजाइश है कि हम सोच भी नहीं सकते। अगर तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो न केवल शहरों में बल्कि दूर-दराज के गांवों में भी रोजगार के लाखों नए मौके पैदा किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि हमें अपनी वर्कफोर्स को नई तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा के लिए तैयार करना होगा। वक्त की मांग है कि हम लगातार कुछ नया सीखते रहें और खुद को अपग्रेड करते रहें।
दुनिया भर में धाक जमाएगा भारतीय स्टार्टअप
भारत ने हाल के वर्षों में कई विकसित देशों के साथ जो व्यापारिक समझौते (FTAs) किए हैं, उनका सीधा फायदा अब हमारे स्टार्टअप्स को मिलने वाला है। पीयूष गोयल ने बताया कि इन समझौतों से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और भारतीय उद्यमियों के लिए विदेशी बाजारों के दरवाजे खुल गए हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे केवल भारत तक सीमित न रहें, बल्कि विदेशी स्टार्टअप्स के साथ तालमेल बिठाएं और डिजिटल पेमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाएं।
खासकर डीप-टेक यानी गहरी तकनीक के क्षेत्र में सरकार का रुख बेहद सकारात्मक है। सरकार ने स्टार्टअप्स की शुरुआती मदद के लिए 10,000 करोड़ रुपये का दूसरा फंड ऑफ फंड्स तैयार किया है, जो उन स्टार्टअप्स के लिए संजीवनी का काम करेगा जो तकनीक के दम पर कुछ बड़ा करना चाहते हैं।
स्पेस और छोटे कारीगरों की नई पहचान
कभी हम अंतरिक्ष की दौड़ में दूसरों को देखते थे, लेकिन आज भारत के स्पेस सेक्टर में 350 से ज्यादा स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं। इस सेक्टर की वैल्यू 2 बिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है। गोयल ने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ सालों में अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत कई ‘यूनिकॉर्न’ (एक अरब डॉलर से ज्यादा की कंपनी) दुनिया को देगा।
वहीं, दूसरी ओर उन्होंने हमारे पारंपरिक हस्तशिल्प और छोटे कारीगरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीक केवल रॉकेट बनाने के लिए नहीं है, बल्कि हमारे बुनकरों और कारीगरों की इन्वेंट्री और बाजार तक पहुंच आसान बनाने के लिए भी है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) और ONDC जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए अब एक छोटा कलाकार भी सीधे बड़े बाजार से जुड़ सकता है।
इस खास चर्चा में ओयो रूम्स के रितेश अग्रवाल, बोट के अमन गुप्ता और मिनिमलिस्ट के मोहित यादव जैसे बड़े चेहरे भी शामिल थे। चर्चा का सार यही रहा कि अगर हम अपनी सप्लाई चेन मजबूत कर लें और छोटे उद्यमियों को बड़े निवेशकों से जोड़ दें, तो भारत को दुनिया की स्टार्टअप राजधानी बनने से कोई नहीं रोक सकता।



