21 हजार करोड़ के हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, महाराष्ट्र–ओडिशा को मिलेगी नई रफ्तार
साल 2025 के आखिरी दिन कैबिनेट ने 21 हजार करोड़ रुपये के दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी। महाराष्ट्र में 6 लेन ग्रीनफील्ड हाईवे और ओडिशा में एनएच-326 के चौड़ीकरण से कनेक्टिविटी और रफ्तार दोनों बढ़ेंगी।
- भारत के हाईवे नेटवर्क को नई रफ्तार देने की तैयारी
- कैबिनेट बैठक में 21 हजार करोड़ के दो बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी
- महाराष्ट्र से ओडिशा तक कनेक्टिविटी और स्पीड दोनों पर फोकस
- दिल्ली–चेन्नई कॉरिडोर को मिलेगा नया सपोर्ट
साल 2025 के आखिरी दिन केंद्र सरकार ने देश के सड़क नेटवर्क को लेकर एक अहम कदम उठाया। कैबिनेट की बैठक में दो बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत करीब 21 हजार करोड़ रुपये है। इन फैसलों से महाराष्ट्र और ओडिशा जैसे राज्यों में न सिर्फ कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विन वैष्णव ने बताया कि ये प्रोजेक्ट्स आने वाले वर्षों में यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदलने वाले हैं।
महाराष्ट्र में 6 लेन ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी
कैबिनेट ने महाराष्ट्र में नासिक से सोलापुर के बीच 374 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड हाईवे को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 19,142 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह हाईवे आधुनिक डिजाइन पर आधारित होगा और इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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इस हाईवे में 27 बड़े पुल, 164 छोटे पुल, 5.6 किलोमीटर लंबा वायडक्ट, 5 रेल ओवर ब्रिज, 10 इंटरचेंज, 17 एंट्री–एग्जिट प्वाइंट और 14 रेस्ट एरिया बनाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक लाइफलाइन बनेगा।
दूरी घटेगी, रफ्तार बढ़ेगी
नए हाईवे के बनने से नासिक और सोलापुर के बीच की दूरी 432 किलोमीटर से घटकर 374 किलोमीटर रह जाएगी। इसके साथ ही औसत यात्रा गति 60 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकेगी। यह हाईवे चेन्नई पोर्ट और हजीरा पोर्ट के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, जिससे माल परिवहन तेज और सस्ता होने की संभावना है।
दिल्ली–चेन्नई कॉरिडोर को मिलेगा सपोर्ट
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक यह 6 लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट सूरत–चेन्नई हाई स्पीड कॉरिडोर का हिस्सा है। साथ ही यह दिल्ली को चेन्नई से आधुनिक और तेज हाईवे नेटवर्क के जरिए जोड़ने की बड़ी योजना में भी अहम भूमिका निभाएगा। सरकार इसे भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की रीढ़ के रूप में देख रही है।
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ओडिशा के अंदरूनी इलाकों को मिलेगा नया रास्ता
दूसरी ओर ओडिशा में एनएच-326 को चौड़ा करने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है। मोहना से कोरापुट के बीच 206 किलोमीटर लंबे इस हाईवे को दो लेन का आधुनिक मार्ग बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 1,526 करोड़ रुपये है और इसे भी दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह हाईवे ओडिशा के अंदरूनी और दूरदराज इलाकों से गुजरता है। इसके बनने से राज्य के पूर्वी हिस्से से दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
विकास और रोजगार को मिलेगी रफ्तार
सरकार का दावा है कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि निर्माण के दौरान और बाद में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सड़कें जब मजबूत होती हैं, तो उनके आसपास के इलाकों में कारोबार और निवेश अपने आप बढ़ने लगता है।
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