चेन्नई में डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: 15 टन लाल चंदन बरामद, तस्करी नेटवर्क बेनकाब

Chennai News: चेन्नई से लाल चंदन की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को धराशायी करते हुए डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने ऐसा ऑपरेशन अंजाम दिया, जिसने एजेंसी की हालिया सबसे महत्वपूर्ण कामयाबियों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। खुफिया इनपुट के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई ने न केवल 15 मीट्रिक टन प्रतिबंधित लाल चंदन को जब्त कर लिया, बल्कि उन पैटर्न्स को भी उजागर कर दिया जिनके सहारे तस्कर स्थानीय गोदामों को अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की सप्लाई चेन में बदलते जा रहे थे। जब्त माल की कुल कीमत करीब 6.26 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि डीआरआई ने तीन दिनों तक—9 से 11 दिसंबर—चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों में बेहद सटीक तरीके से छापेमारी की। 169 ग्रेड-A लॉग्स (करीब 5.55 टन) एक ऐसे गोदाम से बरामद हुए जहां 76 लॉग्स को सफेद HDPE पैकिंग में लपेटकर “घरेलू सामान” के नाम से ट्रक में भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। यह तरीका इंगित करता है कि तस्कर नए तकनीकी माध्यमों और पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश कर रहे थे।

अन्य दो ठिकानों से 9.55 टन लॉग्स, जड़ें और लाल चंदन से बने फर्नीचर बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि तस्कर लाल चंदन के रूप बदलकर उसे अवैध निर्यात के लिए “कम जोखिम वाला कार्गो” दिखाने की कोशिश कर रहे थे। बरामद किए गए सभी सामान—तस्करी वाला माल और उसे छिपाने के लिए रखा गया घरेलू सामान—दोनों को कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत जब्त कर लिया गया है।

गिरफ्तार चार लोगों में मुख्य साजिशकर्ता, पैकिंग-ट्रांसपोर्ट सेटअप संभालने वाले दो सहयोगी और सप्लायर की तरफ से एक बिचौलिया शामिल है। लाल चंदन, जो CITES की Appendix-II और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-IV में सूचीबद्ध है, का निर्यात बेहद सख्ती से नियंत्रित है। इसके बावजूद, इस बार तस्कर इसकी खेप दिल्ली के रास्ते विदेश भेजने की तैयारी में थे।

इस ऑपरेशन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि डीआरआई हाल के महीनों में लगातार संगठित अपराध और रासायनिक ड्रग नेटवर्क पर शिकंजा कस रही है। पिछले हफ्ते महाराष्ट्र के वर्धा में गिरफ्तारियां इसी रणनीति की अगली कड़ी थीं। “ऑपरेशन हिंटरलैंड ब्रू” के तहत वहां एक गुप्त मेफेड्रोन फैक्ट्री पकड़ी गई, जहाँ से 128 किलो मेफेड्रोन (कीमत लगभग 192 करोड़ रुपये) और 245 किलो प्रीकर्सर रसायन बरामद किए गए। यह फैक्ट्री घने झाड़ियों वाले एक एकांत क्षेत्र में चलाई जा रही थी, जिसे देखने भर से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था कि यह एक हाई-वैल्यू ड्रग नेटवर्क का मुख्य केंद्र है।

दोनों ऑपरेशनों की सफलता ये संकेत देती है कि डीआरआई अब अपराधियों की रणनीतियों—गुप्त लोकेशन, वैकल्पिक पैकिंग, और मल्टी-स्टेट सप्लाई रूट—को समझकर पूरी ताकत के साथ जवाब दे रही है। एजेंसी के एक अधिकारी के अनुसार, “ये कार्रवाइयाँ केवल माल बरामद करने का मामला नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की रीढ़ तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम हैं।”

चेन्नई की कार्रवाई ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी चिंताओं को भी सामने ला दिया है। लाल चंदन जैसे कीमती और संरक्षित वृक्षों की कटाई न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोहों को भी बढ़ावा देती है। डीआरआई की यह सफलता ऐसे समय आई है, जब सरकार देश में पारिस्थितिक संपदा की रक्षा को लेकर और सख्त नीतियाँ लागू करने की तैयारी कर रही है।

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Rajveer singh

राजवीर सिंह एक पेशेवर कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता का अनुभव है और स्थानीय, सामुदायिक और अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं की गहरी समझ रखते हैं। वे अपने ज्ञान का उपयोग न केवल अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि, बल्कि अपनी प्रत्यक्ष समझ के आधार पर जानकारीपूर्ण लेख लिखने में करते हैं। वे केवल सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि आवाज़ उठाने के लिए भी लिखते हैं।
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