EPF Interest Rate Cut: देश के करोड़ों प्राइवेट कर्मचारियों के लिए मार्च का महीना सिर्फ होली के रंगों वाला नहीं, बल्कि उनके भविष्य की जमापूंजी (PF) की दिशा तय करने वाला साबित होने वाला है। एक तरफ जहां महंगाई की मार कम होने का नाम नहीं ले रही, वहीं दूसरी तरफ खबर है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ब्याज दरों में कटौती की तैयारी कर रहा है।
क्या कम हो जाएगा आपकी बचत का ‘मुनाफा’?
सूत्रों के मुताबिक, ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की मार्च के पहले हफ्ते में होने वाली बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दरों पर बड़ा फैसला हो सकता है। चर्चा है कि वर्तमान में मिल रहे 8.25% ब्याज को घटाकर 8% से 8.20% के बीच किया जा सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण ईपीएफओ के घटते ‘कॉर्पस’ (Corpus) को बताया जा रहा है। सरल शब्दों में कहें तो निवेश पर मिलने वाला रिटर्न उम्मीद के मुताबिक नहीं रहने की वजह से बोर्ड यह कड़ा कदम उठा सकता है।
चुनाव कनेक्शन: क्या बच जाएगी आपकी ब्याज दर?
इस खबर का एक दूसरा और दिलचस्प पहलू भी है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार शायद ही मिडिल क्लास को इस वक्त नाराज करने का जोखिम लेगी। मुमकिन है कि सियासी समीकरणों के चलते ब्याज दरों को लगातार तीसरे साल यथावत (As-is) रखा जाए।
सैलरी लिमिट पर सुप्रीम कोर्ट का ‘हथौड़ा’
ब्याज दरों के साथ-साथ एक और बड़ी चर्चा ‘वेज सीलिंग’ को लेकर है। वर्तमान में 15,000 रुपये की सैलरी लिमिट है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का प्रस्ताव मेज पर है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में सख्त रुख अपनाते हुए श्रम मंत्रालय को 4 महीने के भीतर इस पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था।
अगर यह लिमिट बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि अब ज्यादा कर्मचारी पीएफ के दायरे में आएंगे और उनकी भविष्य की बचत का फंड बड़ा होगा। हालांकि, कंपनियों की ओर से इसका विरोध भी शुरू हो गया है क्योंकि इससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
प्रक्रिया क्या होगी?
फरवरी के आखिरी हफ्ते में होने वाली ऑडिट कमेटी की बैठक में निवेश के आंकड़ों को खंगाला जाएगा। इसके बाद CBT अपनी सिफारिशें वित्त मंत्रालय को भेजेगा। यदि वित्त मंत्रालय हरी झंडी देता है, तो साल के मध्य तक आपके खाते में ब्याज का पैसा क्रेडिट होना शुरू हो जाएगा।
