दीवाली बाद भी उत्तर भारत में सांसों का संकट, पराली जलाने से बिगड़ रही हवा

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2025. दीवाली के चार दिन बीत जाने के बाद भी उत्तर भारत में वायु प्रदूषण का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है. गुरुवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में बनी हुई है. खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है. पराली जलाने की घटनाएं भी इस संकट को और गंभीर बना रही हैं.

पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने का सिलसिला जारी

सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में बुधवार को 79 जगहों पर पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं. वहीं, उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पराली जलाने के आरोप में छह किसानों पर 2500-2500 रुपये का जुर्माना लगाया गया. हरियाणा में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. सीपीसीबी के समीर ऐप के मुताबिक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार हरियाणा के पांच शहर देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं. इनमें बहादुरगढ़ (AQI 325), धारूहेड़ा (322), जींद (302), रोहतक (299) और फरीदाबाद (298) शामिल हैं. बुधवार-गुरुवार की रात जींद का एक्यूआइ 400 के पार पहुंच गया था, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है.

दिल्ली में हल्का सुधार, लेकिन खतरा बरकरार

दिल्ली में गुरुवार को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार देखा गया, लेकिन हवा अभी भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में है. दोपहर 4 बजे दिल्ली का औसत एक्यूआइ 305 दर्ज किया गया. राजधानी में 38 निगरानी स्टेशनों में से 23 पर हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ और 14 पर ‘खराब’ श्रेणी में रही. विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने, वाहनों के धुएं और मौसमी बदलाव के कारण दिल्ली की हवा जहरीली बनी हुई है.

उत्तर भारत के अन्य शहरों में भी हालात चिंताजनक

पंजाब के अमृतसर, लुधियाना और जालंधर में गुरुवार को एक्यूआइ 300 से ऊपर रहा, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है. उत्तर प्रदेश में मेरठ सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एक्यूआइ 300 दर्ज किया गया. नोएडा में एक्यूआइ 276 रहा. राजस्थान के धौलपुर में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक रहा, जहां एक्यूआइ 311 दर्ज किया गया.

प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदम

हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संवेदनशील शहरों में कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं. वाहनों के धुएं पर नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक और धूल को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पराली जलाने पर पूरी तरह रोक नहीं लगती, प्रदूषण का यह संकट कम नहीं होगा.

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से मास्क पहनने, बाहर कम निकलने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है. प्रदूषण के इस स्तर से सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं.

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Saloni Yadav

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