फरीदाबाद विस्फोटक कांड: मस्जिद के इमाम की दोस्ती ने खोला राज, 2900 किलो बारूद की बोरियां ‘खाद’ बताकर छिपाई!

फरीदाबाद/नूंह। राजधानी दिल्ली से महज चंद किलोमीटर दूर हरियाणा के फरीदाबाद में जो कुछ सामने आया वो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा झटका है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के पास वाली मस्जिद के 40 साल के इमाम इश्तियाक को जांच एजेंसियां हिरासत में ले चुकी हैं। उनके घर से करीब 2900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई जो खाद की बोरियों में छिपाकर रखी गई थी।

सूत्र बता रहे हैं कि इमाम का ताल्लुक पुलवामा के डॉक्टर मुजम्मिल शकील से था जो पांच वक्त का नमाजी बनकर मस्जिद आता-जाता था। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये सिर्फ मकान मालिक-किरायेदार का रिश्ता था या कुछ और?

इमाम इश्तियाक: गांव से मस्जिद तक का सफर, कट्टर धार्मिक झुकाव!

नूंह जिले के सिंगार गांव का रहने वाला इश्तियाक कभी स्कूल नहीं गया। झिमरावट के मदरसे से इस्लामिक तालीम ली और धर्म की राह पर चल पड़ा। गांव के सरपंच साकित खान बताते हैं: “परिवार दिहाड़ी-मजदूरी करता था। इश्तियाक के तीन भाई हैं ओर इनमें से कोई हज पर नहीं गया। वो शुरू से धर्म की तरफ झुका हुआ था ओर काफी कट्टर भी था। करीब 20 साल पहले बीवी लेकर धौज शिफ्ट हो गया।”

2005 में अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस की बड़ी मस्जिद में इमाम की नौकरी लगी। मस्जिद में ही छोटा सा कमरा मिला जहां पत्नी (राजस्थान मूल की) और चार बच्चों (दो बेटियां) के साथ रहता था। भाई मुबीन कहते हैं, “भाई पढ़ाने गया था फिर परिवार ले गया। भैंस पालता था, दूध यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों को बेचता। महीने की तनख्वाह मुश्किल से 9000 रुपए।” गांव में अब चर्चे हैं, पुलिस आने के बाद ही नाम याद आया। 15 दिन पहले नूंह के इस्लामिक जलसे में आया था ओर बीच बीच में मां से मिलने आता रहता था। पिता गुजर चुके।

डॉक्टर मुजम्मिल से दोस्ती: नमाज से दावत तक, फिर बारूद की बोरियां!

तीन साल पहले अल-फलाह में सर्जन बने पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल शकील पक्के नमाजी थे। मस्जिद में ही इश्तियाक से मुलाकात हुई। इमाम का बेटा बताता है, “अब्बा और डॉक्टर की गहरी दोस्ती हो गई। कई बार घर दावत पर आए। कुरान और अल्लाह की बातें होतीं, कभी शक नहीं हुआ।” पुलवामा से 15 दिन की छुट्टी काटकर लौटे तो एक रात इमाम के घर रुके।

इश्तियाक ने 5-6 साल पहले फतेहपुर तगा में पुराना चार कमरों का मकान खरीदा। दोस्ती के हवाले पर मुजम्मिल ने एक हिस्सा किराए पर ले लिया। पड़ोसी बताते हैं, “इमाम किराया लेने आता था। बोरी में बंद सामान रखवाने आता। डॉक्टर ने कहा था- खाद है।” एक बुजुर्ग महिला ने पूछा तो मुजम्मिल बोला, “खाद के कट्टे हैं।” 20 दिन पहले सामान रखा गया। गली में वसीम के घर का सीसीटीवी पुलिस ले गई, जांच चल रही है कि इतना बारूद कब-कैसे आया।

जांच का सच: सिर्फ मकान मालिक या मॉड्यूल का हिस्सा?

8-9 नवंबर को फतेहपुर तगा वाले घर से विस्फोटक बरामद हुए तब इश्तियाक हिरासत में आया। एजेंसियां अभी खुलासा नहीं कर रहीं- क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि घर उनका था या पूरे मॉड्यूल में रोल था? जम्मू-कश्मीर पुलिस और हरियाणा क्राइम ब्रांच पूछताछ कर रही। सूत्र कहते हैं, मुजम्मिल जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था, पुलवामा से सामान लाया। इमाम का रिश्ता कितना गहरा, ये जांच बताएगी।

फिलहाल गांव से शहर तक सन्नाटा है। सरपंच कहते हैं, “चेहरा भी ठीक से याद नहीं था अब पुलिस आई तो सब पता चला।” सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं, बड़ा षड्यंत्र टला लगता है। आगे की जांच से और राज खुलेंगे। देश की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है ओर ऐसे मामलों में सतर्क रहना जरूरी।

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Saloni Yadav

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