उज्जैन में विकास का महाकुंभ: CM मोहन यादव ने दी ₹1133 करोड़ की सौगात, अब 2055 तक नहीं प्यासा रहेगा महाकाल का शहर
सीएम मोहन यादव ने उज्जैन को ₹1133 करोड़ की जल योजना की सौगात दी, जिससे 2055 तक पानी की किल्लत खत्म होगी। साथ ही, पहली बार आयोजित 'महाकाल वन मेला' और छात्रों को लैपटॉप वितरण के जरिए विकास और परंपरा का नया संगम देखने को मिला।
उज्जैन: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज अपने गृह नगर उज्जैन में एक अलग ही अंदाज में नजर आए। केवल शिलान्यास और उद्घाटन के औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित न रहकर, सीएम ने उज्जैन के अगले 30 सालों के भविष्य का खाका जनता के सामने रखा। विकास की इस बड़ी छलांग में सबसे अहम रही ‘हरियाखेड़ी जल संवर्धन योजना’।
2055 तक पानी की चिंता खत्म
मुख्यमंत्री ने ₹1,133 करोड़ से अधिक की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की नींव रखते हुए स्पष्ट किया कि यह सिर्फ पाइपलाइन बिछाने का काम नहीं है, बल्कि उज्जैन की आने वाली पीढ़ियों की प्यास बुझाने का संकल्प है। इस प्रोजेक्ट के तहत शहर के कोने-कोने में 17 नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे, जिनकी क्षमता 3,000 किलोलीटर तक होगी। 708 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का जाल बिछाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि साल 2055 तक शिप्रा के तट पर बसे इस शहर को पानी के लिए न तरसना पड़े। मुख्यमंत्री ने खुद कालिदास अकादमी पहुंचकर इस प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी का मुआयना किया और तकनीकी पहलुओं को समझा।
तकनीक और सम्मान का संगम
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान सीएम का मानवीय चेहरा भी देखने को मिला। ‘प्रोजेक्ट स्वाध्याय‘ के तहत मेधावी छात्रों को लैपटॉप देते समय उनके चेहरे की चमक बता रही थी कि शिक्षा उनकी प्राथमिकता है। वहीं, शहर को स्वच्छ रखने वाले ‘सफाई मित्रों’ को किट और निरीक्षकों को वायरलेस डिवाइस बांटकर उन्होंने प्रशासन को हाई-टेक करने का संदेश दिया।
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पहली बार ‘महाकाल वन मेला’
जब जंगलों से महकी अवंतिका दोपहर बाद, दशहरा मैदान एक अलग ही रंग में रंगा नजर आया। ‘समृद्ध वन, सुखी जन’ की थीम पर पहली बार उज्जैन में ‘महाकाल वन मेला’ का भव्य शुभारंभ हुआ। 11 से 16 फरवरी तक चलने वाले इस मेले में न केवल आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों की खुशबू है, बल्कि वनवासियों की मेहनत को बाजार देने की एक बड़ी कोशिश भी है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान न केवल प्रदर्शनी देखी, बल्कि वन विभाग के उन अधिकारियों और प्रहरियों को सम्मानित भी किया, जो गुमनामी में रहकर पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं। मेले में मुफ्त आयुर्वेदिक परामर्श और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
डॉ. मोहन यादव का आज का दौरा यह साफ करता है कि वे उज्जैन को सिर्फ एक धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘सस्टेनेबल सिटी’ के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहाँ जल प्रबंधन से लेकर डिजिटल शिक्षा तक सब कुछ विश्वस्तरीय हो।
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