रेवाड़ी: खाकी का नेक संदेश! SI ने बेटे के लग्न में शगुन का सिर्फ ‘1 रुपया’ लेकर पेश की मिसाल, पूर्व मंत्रियों ने भी थपथपाई पीठ
रेवाड़ी के SI यशवंत सिंह यादव ने अपने बेटे के लग्न में सिर्फ 1 रुपया लेकर दहेज लोभियों को कड़ा संदेश दिया है। उच्च शिक्षित बहू के स्वागत में पुलिस अधिकारी की इस पहल की पूर्व मंत्रियों और समाज ने जमकर प्रशंसा की है।
- दहेज प्रथा को नकारते हुए मात्र 1 रुपया शगुन
- ससुर ने कहा- शिक्षित बेटी ही असली संपत्ति है
- दहेज मुक्त भारत की दिशा में बड़ा उदाहरण
- सादगी अपनाकर खाकी ने पेश की मानवता की मिसाल
रेवाड़ी/हरियाणा: आज के दौर में जहां शादियां दिखावे और भारी-भरकम लेन-देन का जरिया बनती जा रही हैं वहीं हरियाणा पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर (SI) ने समाज के सामने एक ऐसी लकीर खींच दी है जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। रेवाड़ी में तैनात SI यशवंत सिंह यादव ने अपने बेटे के लग्न समारोह में दहेज और भारी शगुन को ठुकरा कर सिर्फ 1 रुपया स्वीकार किया।
रिश्ता पवित्र बंधन है, व्यापार नहीं: SI यशवंत सिंह
मामाड़िया आसामपुर के रहने वाले यशवंत सिंह यादव का मानना है कि शादी दो परिवारों का मिलन है न कि कोई वित्तीय सौदा। उनके बेटे आकाश जो सिंचाई विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं, का रिश्ता महेंद्रगढ़ के गांव शाहदतनगर की रहने वाली योगिता से तय हुआ है। योगिता न केवल उच्च शिक्षित हैं बल्कि उन्होंने NEET, HTET, CET और M.Com जैसी परीक्षाएं भी उत्तीर्ण की हैं।
यशवंत सिंह ने भावुक होते हुए कहा की हम चाहते हैं कि समाज में यह संदेश जाए कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि सम्मान हैं। हमने अपने परिवार से इस कुप्रथा को खत्म करने की शुरुआत की है।
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सियासी दिग्गजों का लगा जमावड़ा, पहल की हुई सराहना
इस खास मौके पर सियासत के दिग्गज भी आशीर्वाद देने पहुंचे। आकाश के मामा और पूर्व मंत्री विक्रम सिंह यादव खुद ‘भाती’ बनकर समारोह में शामिल हुए। उनके साथ पूर्व मंत्री डॉ. बनवारी लाल और मानेसर के सीनियर डिप्टी मेयर परवीन यादव ने भी शिरकत की।
नेताओं ने SI यशवंत सिंह के इस फैसले को ‘सामाजिक क्रांति’ करार दिया। डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि जब पुलिस विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी इस तरह की पहल करता है, तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। यह कदम उन लोगों के लिए आईना है जो शादी के नाम पर भारी लेन-देन को अपनी शान समझते हैं।
एक मिसाल: शिक्षा और संस्कार का संगम
इस विवाह की खास बात यह भी है कि वधू पक्ष आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वर पक्ष ने किसी भी तरह के उपहार या नकदी से परहेज किया। ग्रामीणों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति ने अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा का उपयोग समाज को सुधारने के लिए किया है।
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