आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज पर लग सकती है रोक – हरियाणा के अस्पतालों ने दी सरकार को चेतावनी

गुड़गांव में 60 निजी अस्पताल इस योजना का हिस्सा हैं जिनमें पार्क अस्पताल, सेंटर फॉर साइट, पुष्पांजलि अस्पताल और कमला अस्पताल जैसे नाम शामिल हैं। इन अस्पतालों ने साफ कर दिया है कि 7 अगस्त से वे नए मरीजों को इस योजना के तहत भर्ती नहीं करेंगे हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।

Haryana News – हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज देने वाले निजी अस्पतालों ने सरकार को सख्त चेतावनी दी है की अगर बकाया 500 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार की और से जल्द नहीं किया गया तो 7 अगस्त 2025 से करीब 650 निजी अस्पताल इस योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद कर सकते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हरियाणा इकाई का कहना है कि सरकार ने बार-बार भुगतान का वादा किया लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे अस्पतालों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और अस्पताल संचालकों का कहना है की कब तक आखिर अस्पताल अपने खर्चे पर मरीजों का इलाज करता रहेगा। आइये जानते है की क्या है पूरा मामला –

क्या है पूरा मामला?

आयुष्मान भारत योजना जिसे 2018 में शुरू किया गया था में गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देती है। हरियाणा में इस योजना के तहत करीब 1.8 करोड़ लोग रजिस्टर्ड हैं। राज्य में 1,300 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं जिनमें 650 निजी अस्पताल हैं। ये अस्पताल मरीजों का मुफ्त इलाज करते हैं और बाद में सरकार से पैसे की मांग करते हैं। लेकिन IMA का कहना है कि मार्च 2025 से अस्पतालों को उनके बिल का सिर्फ 10-15% पैसा ही मिला है।

IMA हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. महावीर जैन ने कहा, “अस्पतालों को अपने डॉक्टरों, कर्मचारियों और सप्लायर्स को पैसे देने में दिक्कत हो रही है। बिना समय पर भुगतान के हम मुफ्त इलाज कैसे जारी रख सकते हैं? अब हालात ऐसे हैं कि इस योजना को चलाना नामुमकिन हो गया है।”

इसे भी पढ़ें: आईएनएस चिल्का पासिंग आउट परेड: 2172 अग्निवीर भारतीय नौसेना में शामिल, महिला शक्ति का दिखा जलवा

मरीजों पर इस फैसले का क्या होगा असर?

अगर अस्पताल इस योजना से हटते हैं तो इसका सबसे ज्यादा असर गरीब मरीजों पर पड़ेगा। गुड़गांव के एक ड्राइवर कमलेश सिंह (41) ने बताया कि इस योजना ने कोविड-19 के दौरान उनकी जान बचाई थी। लेकिन अब उन्हें डर है कि अगर अस्पतालों ने इलाज बंद किया तो उनकी कान की सर्जरी का खर्च वह नहीं उठा पाएंगे।

गुड़गांव में 60 निजी अस्पताल इस योजना का हिस्सा हैं जिनमें पार्क अस्पताल, सेंटर फॉर साइट, पुष्पांजलि अस्पताल और कमला अस्पताल जैसे नाम शामिल हैं। इन अस्पतालों ने साफ कर दिया है कि 7 अगस्त से वे नए मरीजों को इस योजना के तहत भर्ती नहीं करेंगे हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी।

सरकार का रवैया क्या है इसको लेकर?

IMA का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकार से बात की लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। जनवरी 2025 में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मीटिंग के बाद कुछ पैसे जारी हुए थे जिससे सेवाएं बाधित नहीं हुई थीं। लेकिन अब फिर से वही स्थिति बन गई है। IMA के सचिव डॉ. धीरेंद्र के. सोनी ने बताया “हमें मनमाने तरीके से बिल में कटौती का सामना करना पड़ रहा है और हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं मिलता।” हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना की जॉइंट सीईओ अंकिता अधिकारी से इस बारे में जवाब मांगा गया लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

इसे भी पढ़ें: Breaking News: नया बिजली कनेक्शन लेना हुआ सस्ता, स्मार्ट मीटर पर मिलेगी ₹900 की छूट

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) क्या है?

IMA ने सरकार से मांग की है की 15 जुलाई 2025 तक के सारे बकाया पैसे तुरंत दिए जाएं ताकि अस्पतालों में इलाज का कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहे। इसके अलावा भुगतान प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी किया जाए। सरकार की तरफ से इसके साथ ही ये सुनिश्चित भी करना होगा की बिना कारण के बिल में कटौती बंद हो ताकि अस्पतालों को बिना किसी वजह के नुकसान ना उठाना पड़े। IMA ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाए तो मरीजों को होने वाली परेशानी की जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी।

आयुष्मान भारत योजना गरीबों के लिए एक वरदान है जो छोटी जांच से लेकर बड़ी सर्जरी तक का खर्च उठाती है। लेकिन हरियाणा में इसकी राह में कई रुकावटें हैं। भुगतान में देरी के अलावा ऑनलाइन पोर्टल पर दावे दर्ज करने में भी दिक्कतें आ रही हैं। छोटे अस्पतालों को खासतौर पर नुकसान हो रहा है क्योंकि उनके पास दूसरा आय का स्रोत नहीं है।

अब आगे क्या होने वाला है?

मौजूदा समय में जो स्थिति बनी हुई है यह न केवल हरियाणा के स्वास्थ्य ढांचे पर सवाल उठाती है बल्कि गरीब मरीजों के लिए भी बड़ा खतरा है। अगर सरकार और अस्पतालों के बीच जल्द कोई समझौता नहीं हुआ तो लाखों लोग मुफ्त इलाज से वंचित हो सकते हैं। IMA ने साफ कर दिया है कि वे इस योजना से हटना नहीं चाहते लेकिन आर्थिक दबाव के कारण उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा है। अब आने वाले चंद दिनों में ये देखने वाली बात होगी की सरकार इसको लेकर क्या कदम उठती है और अगर पैसे का भुगतान नहीं होता है तो क्या सच में लोगों का इस योजना के तहत इलाज बंद हो जायेगा?

इस श्रेणी की और खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें: ब्रेकिंग न्यूज़

Saloni Yadav

सलोनी यादव (Journalist): एक अनुभवी पत्रकार हैं जिन्होंने अपने 10 साल के करियर में कई अलग-अलग विषयों को बखूबी कवर किया है। उन्होंने कई बड़े प्रकाशनों के साथ काम किया है और अब NFL स्पाइस पर अपनी सेवाएँ दे रही हैं। सलोनी यादव हमेशा प्रामाणिक स्रोतों और अपने अनुभव के आधार पर जानकारी साझा करती हैं और पाठकों को सही और विश्वसनीय सलाह देती हैं। Contact Email: saloniyadav@nflspice.com Website: nflspice.com
फीडबैक या शिकायत के लिए: newsdesk@nflspice.com

Related Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *