दिवाली बम्पर गिफ्ट: EPFO पेंशन 1000 से 2500 रुपये हो सकती है, प्राइवेट कर्मचारियों की लगी लॉटरी!
नई दिल्ली। त्योहारों के मौसम में प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों को सरकारी स्तर पर एक बड़ी राहत मिलने वाली है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से चलाई जाने वाली एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम (EPS) में न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाने का ऐलान होने की कगार पर है। मौजूदा 1000 रुपये मासिक पेंशन अब दोगुनी से ज्यादा होकर 2500 रुपये तक पहुंच सकती है। यह फैसला दिवाली से ठीक पहले आना तो जैसे कर्मचारियों के लिए दीवाली का असली पटाखा फूटने जैसा है।
EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की अहम बैठक हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित हुई, जहां इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। सूत्रों की मानें तो बोर्ड ने पेंशन वृद्धि को हरी झंडी दिखाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया है। कर्मचारी संगठनों ने सालों से इसकी मांग करते आ रहे हैं, और अब लगता है कि उनकी आवाज आखिरकार सुनी जा रही है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार अभी बाकी है, लेकिन उम्मीदें चरम पर हैं।
वर्तमान पेंशन राशि क्यों बनी सिरदर्द?
बात 2014 की है, जब EPS के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये मासिक तय किया गया था। उस समय यह रकम ठीक लगती थी, लेकिन आज के दौर में महंगाई की मार ने इसे नाकाफी बना दिया है। एक सामान्य कर्मचारी के लिए 1000 रुपये से घर का खर्च चलाना तो दूर, दवाई-दरकार जैसी बुनियादी जरूरतें भी मुश्किल से पूरी होती हैं। ट्रेड यूनियंस और पेंशनर्स के समूह लंबे अरसे से चिल्ला रहे हैं कि इसे कम से कम 7500 रुपये तक ले जाया जाए। लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि CBT ने इतनी भारी-भरकम बढ़ोतरी को सिरे से खारिज कर दिया है। फिर भी, 2500 रुपये का प्रस्ताव लाखों रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा।
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पेंशन बढ़ाने की मांग का क्या है लॉजिक?
कर्मचारियों का तर्क बिल्कुल जायज है। आजकल सब्जी का दाम, पेट्रोल का भाव, सब आसमान छू रहा है। 1000 रुपये की पेंशन से गुजारा कैसे हो? यूनियन लीडर्स का कहना है कि यह न सिर्फ कर्मचारियों की जिंदगी आसान करेगा, बल्कि उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत भी बनाएगा। खासकर उन लोगों के लिए, जो प्राइवेट जॉब्स में सालों मेहनत करने के बाद रिटायरमेंट में संघर्ष कर रहे हैं। सरकार की यह पहल श्रमिक कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
EPS पेंशन कैसे तय होती है, जान लीजिए फॉर्मूला
अगर आप भी EPFO मेंबर्स में से हैं, तो पेंशन कैलकुलेशन का तरीका समझना जरूरी है। EPS स्कीम के मुताबिक, पेंशन की गणना का फॉर्मूला सिंपल है: (पेंशनेबल सैलरी × पेंशनेबल सर्विस) / 70। यहां पेंशनेबल सैलरी आपके आखिरी 60 महीनों की औसत सैलरी होती है, जबकि पेंशनेबल सर्विस वह अवधि है जितने साल आपने EPS में योगदान दिया। ध्यान दें, अधिकतम सैलरी कैप 15,000 रुपये मासिक ही मानी जाती है। साथ ही, पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की सर्विस जरूरी है। अगर आपकी सर्विस 10 साल से ज्यादा है, तो पेंशन और ज्यादा आकर्षक हो जाती है।
यह बदलाव लागू होने पर करोड़ों प्राइवेट कर्मचारियों को फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न सिर्फ रिटायर्ड लाइफ सेटल होगी, बल्कि युवा कर्मचारियों में भी स्कीम के प्रति भरोसा बढ़ेगा। EPFO की वेबसाइट पर जल्द ही अपडेट आने की उम्मीद है, तो नजरें टिकाए रखें। दिवाली की रौनक में यह खबर और चमक जोड़ देगी।
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