नितिन नबीन बने भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष: सत्ता को बताया त्याग और तपस्या, जानें पीएम मोदी की मौजूदगी में क्या बोले नए कप्तान
भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पदभार संभालते ही कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। जानिए क्यों उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं बल्कि तपस्या बताया और आगामी चुनावों के लिए क्या है उनका खास प्लान।
- नितिन नबीन ने संभाली भाजपा की कमान और राजनीति को बताया सेवा का तप
- सत्ता के सुख नहीं बल्कि जिम्मेदारी और त्याग के संकल्प से होगी नई शुरुआत
- प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई और नबीन ने कार्यकर्ताओं को समर्पित किया अपना पद
- आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का लक्ष्य और ‘नेशन फर्स्ट’ का बुलंद नारा
नितिन नबीन के हाथों में अब दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा की पतवार है। दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित पार्टी मुख्यालय में जब मंगलवार को उन्होंने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभाला, तो उनके शब्दों में सत्ता का अहंकार नहीं बल्कि एक भारी जिम्मेदारी का अहसास झलका। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके लिए राजनीति कोई ऐश-ओ-आराम की जगह नहीं, बल्कि एक कठिन साधना है।
सत्ता नहीं, यह तो राष्ट्र की आध्यात्मिक सेवा है
कार्यकर्ताओं के हुजूम को संबोधित करते हुए नितिन नबीन ने जो पहली बात कही, उसने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए महज पावर का खेल या आलीशान कुर्सियों का आनंद नहीं है। उनके शब्दों में, “राजनीति कोई उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि त्याग है। यह विलासिता नहीं, तपस्या है। यह अधिकार का पद नहीं बल्कि जिम्मेदारी का अहसास है।” यह बयान सीधे तौर पर उन कार्यकर्ताओं के दिलों को छू गया जो ज़मीनी स्तर पर पार्टी के लिए दिन-रात पसीना बहाते हैं।
सबसे युवा अध्यक्ष और संगठन पर्व की गूँज
भाजपा के ‘संगठन पर्व’ के दौरान नितिन नबीन का निर्विरोध चुना जाना केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर एक नई पीढ़ी को कमान सौंपने का संकेत है। वे भाजपा के इतिहास के अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं। इस मौके पर मंच पर दिग्गजों का जमावड़ा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे कद्दावर नेताओं ने उन्हें फूलों का गुलदस्ता भेंट कर नई पारी की बधाई दी। नबीन ने अपनी सफलता का श्रेय उन साधारण कार्यकर्ताओं को दिया, जिनके सहयोग ने उन्हें इस शिखर तक पहुँचाया।
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मोदी का विजन और बचपन की वो सीख
अपने संबोधन में नबीन काफी भावुक नजर आए। उन्होंने गुजरात के आणंद में प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई अपनी पुरानी मुलाकातों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे पीएम मोदी ने उन्हें सिखाया था कि एक असली नेता वही है जो जनता के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा हो। आज जब देश 2047 के ‘विकसित भारत’ का सपना देख रहा है, तो नबीन ने इसका श्रेय मोदी के उस अटूट विजन को दिया जिसने 140 करोड़ भारतीयों में उम्मीद जगाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी हमेशा ‘नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट और सेल्फ लास्ट’ यानी राष्ट्र प्रथम, दल दूसरे और स्वयं अंतिम के सिद्धांत पर चलेगी।
विरोधियों पर तीखा वार और चुनावी रणभेरी
नितिन नबीन ने केवल अपनी विचारधारा की बात नहीं की, बल्कि विपक्ष की राजनीति पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जो ताकतें भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश कर रही हैं, उनके लिए भारतीय राजनीति में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। अनुच्छेद 370 के हटने का जिक्र करते हुए उन्होंने कश्मीर की बदली सूरत को पार्टी की बड़ी उपलब्धि बताया।
नजरें अब आने वाले विधानसभा चुनावों पर हैं। असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुदुचेरी में होने वाले चुनावों को लेकर नबीन पूरी तरह आश्वस्त दिखे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि उनकी मेहनत इन पाँचों राज्यों में भाजपा का परचम लहराएगी। दिल्ली की कड़कती ठंड के बीच भाजपा मुख्यालय में जिस गर्मजोशी के साथ नबीन का स्वागत हुआ, उसने साफ कर दिया है कि भाजपा अब एक नई ऊर्जा और युवा जोश के साथ अपने अगले सफर पर निकल चुकी है।
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