मंत्री प्रतिमा बागरी पर बढ़ी मुश्किलें: 46 किलो गांजा बरामद, रिश्तेदार की गिरफ्तारी से सियासत में भूचाल
मध्य प्रदेश सरकार की महिला मंत्री प्रतिमा बागरी इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में हैं। पहले बहनोई पर आरोप, अब परिवार के एक और सदस्य की गिरफ्तारी—राजनीतिक गलियारे इसे महज संयोग नहीं मान रहे। सतना जिले में पुलिस ने 46 किलो गांजा (Cannabis) जब्त करते हुए अनिल बागरी नाम के व्यक्ति को पकड़ा, जिसके बारे में विपक्ष का दावा है कि वह मंत्री का “भाई” है। लेकिन प्रतिमा बागरी ने मीडिया के सामने साफ शब्दों में कहा—“जिसको मेरा भाई बताया जा रहा है, वह मेरा सगा भाई नहीं, दूर का रिश्तेदार है।”
यह बयान आते ही मामला और उलझ गया है। राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है और विपक्ष ने इसे सरकार की “नैतिक जिम्मेदारी” से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्री बागरी दोनों पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है।
क्या इस्तीफा देंगी प्रतिमा बागरी?
सोमवार को रामपुर बघेलान पुलिस ने अनिल बागरी और उसके साथी पंकज सिंह को गांजा तस्करी (Drug Trafficking) के आरोप में गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से भारी मात्रा में 46 किलो गांजा बरामद होने के बाद कांग्रेस हमलावर हो गई है। विपक्ष ने पूछा—“जब परिवार के लोग लगातार विवादों में फंस रहे हैं, तो मंत्री पद पर बने रहने का क्या अधिकार बचता है?”
कांग्रेस ने आधिकारिक बयान में प्रतिमा बागरी से इस्तीफे की मांग की है। वहीं बीजेपी इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में दिख रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि “कानून अपना काम कर रहा है और रिश्तेदारी को अपराध से जोड़ना राजनीति का ओछापन है।”
फिलहाल पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। क्या यह गिरफ्तारी किसी बड़े ड्रग रैकेट (Drug Network) की कड़ी है? क्या विपक्ष का आरोप सही है या ये सिर्फ राजनीतिक लाभ उठाने की रणनीति है—इन सवालों के जवाब अभी जांच पर टिका है।
कौन हैं मंत्री प्रतिमा बागरी?
प्रतिमा बागरी, सतना जिले की रैंगाव सीट से 2022 में पहली बार विधायक चुनी गईं और सीधे मंत्री पद तक पहुंचीं। वर्तमान में वह नगरीय विकास एवं आवास विभाग (Urban Development & Housing Ministry) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
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उनकी राजनीति जड़ों में पारिवारिक विरासत है। उनके पिता जय प्रताप बागरी और माँ कमलेश बागरी दोनों जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। बीजेपी के महिला मोर्चा से वह लंबे समय से जुड़ी रहीं और सतना जिले की महामंत्री भी रहीं। बीए और एलएलबी (LLB) करने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
मगर अब उनकी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा इम्तिहान सामने है—क्या वह इस विवाद से खुद को साफ-सुथरा बाहर निकाल पाएंगी या यह मुद्दा मंत्री पद पर असर डालेगा? आने वाले दिनों में सत्ता और सियासत, दोनों के लिए माहौल और गर्म होने वाला है।
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