अलवर में 500 करोड़ का साइबर ठगी रैकेट पकड़ा गया, बैंक कर्मचारी भी शामिल

राजस्थान पुलिस ने अलवर में 500 करोड़ रुपये की साइबर ठगी रैकेट पकड़ी। 16 लोग गिरफ्तार, जिसमें एक निजी बैंक के 4 कर्मचारी शामिल। फर्जी बैंक खाते (Mule Accounts) ऑनलाइन स्कैम, गेमिंग और क्रिप्टो ट्रांजेक्शन के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।

राजस्थान पुलिस ने अलवर में एक विशाल साइबर ठगी रैकेट (Cyber Fraud Racket) का पर्दाफाश किया है। इस रैकेट ने 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने 16 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक निजी बैंक के चार कर्मचारी भी शामिल हैं। यह गैंग फर्जी बैंक खातों (Mule Accounts) के जरिए ठगी के पैसे को देशभर में घुमाता था। आइए जानते हैं पूरी कहानी।

कैसे काम करता था यह रैकेट

पुलिस के मुताबिक, यह गैंग फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके करंट और कॉरपोरेट बैंक खाते खोलता था। इन खातों को वॉट्सऐप और टेलीग्राम (WhatsApp and Telegram Groups) के जरिए साइबर अपराधियों को बेचा जाता था। ये खाते ऑनलाइन बेटिंग, गेमिंग स्कैम (Online Betting, Gaming Scams) और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन (Cryptocurrency Transactions) से कमाए गए काले धन को छुपाने और ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल होते थे। नए मोबाइल नंबर और APK फाइल्स की मदद से अपराधियों को सीधे इंटरनेट बैंकिंग (Internet Banking) की सुविधा मिल जाती थी।

छापेमारी में क्या बरामद हुआ

पुलिस ने छापेमारी के दौरान कई अहम सबूत जुटाए:

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ये सामान इस रैकेट के बड़े पैमाने को दर्शाता है।

मुख्य सरगनाओं का पर्दाफाश

गिरफ्तार किए गए लोगों में दो मुख्य सरगना हैं:

  • विकास शर्मा (38), जो जयपुर का रहने वाला है और दिल्ली में रह रहा था।

  • रमेश यादव (34), हरियाणा के रोहतक का निवासी।

इसके अलावा, एक निजी बैंक के चार कर्मचारियों को भी पकड़ा गया, जिन्होंने फर्जी दस्तावेजों से खाते खोलने में मदद की। इन कर्मचारियों ने बिचौलियों को खाते बेचे, जो बाद में साइबर अपराधियों तक पहुंचे।

रैकेट का दायरा

पुलिस जांच से पता चला कि यह रैकेट कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं था।

  • 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन (Massive Transactions) इन फर्जी खातों से हुआ।

  • नेशनल साइबरक्राइम पोर्टल (NCRP) पर 3,500 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हैं।

  • 80 करोड़ रुपये की ठगी सीधे इस रैकेट से जुड़ी पाई गई।

म्यूल अकाउंट्स का खतरा

म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) साइबर ठगी की दुनिया में एक बड़ा हथियार हैं। ये खाते चोरी के पैसे को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जिससे असली अपराधी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। जब बैंक कर्मचारी भी इस तरह के रैकेट में शामिल हो जाते हैं, तो साइबर अपराधियों का नेटवर्क और मजबूत हो जाता है।

पुलिस की कार्रवाई जारी

अलवर के एसपी राहुल शर्मा ने बताया कि जांच अभी जारी है। पुलिस को शक है कि इस रैकेट से और भी लोग जुड़े हो सकते हैं। साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।

यह खुलासा साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) के लिए एक बड़ा कदम है। लोगों से अपील है कि अनजान लिंक या ऑफर पर भरोसा न करें और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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