टी20 वर्ल्ड कप बॉयकॉट पर बांग्लादेशी मंत्री के यू-टर्न ने बढ़ाई हलचल, 24 घंटे में बदल दी अपनी ही बात
भारत में आयोजित टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार को लेकर बांग्लादेश के स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल अपने ही बयान में फंस गए हैं। 24 घंटे के भीतर उन्होंने बॉयकॉट का ठीकरा बीसीबी के बजाय सरकार के सिर फोड़ते हुए अपनी गलती स्वीकार की। पढ़ें पूरी इनसाइड रिपोर्ट।
- मंत्रालय और बोर्ड के बीच विरोधाभास
- राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम खिलाड़ियों का त्याग
- आईसीसी के सख्त रुख का परिणाम
- बयानबाजी के भंवर में फंसी सरकार
ढाका / न्यूज़ डेस्क: क्रिकेट के मैदान पर जितनी तल्खी भारत और बांग्लादेश के बीच रहती है, उससे कहीं ज्यादा नाटकीयता अब बंद कमरों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखने लगी है। टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के खिलाफ न खेलने के फैसले ने ढाका के गलियारों में एक ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसे संभालने में सरकार के पसीने छूट रहे हैं।
मामला तब गरमाया जब बांग्लादेश के स्पोर्ट्स एडवाइजर आसिफ नजरुल ने मंगलवार को यह कहकर सबको चौंका दिया कि वर्ल्ड कप बॉयकॉट का फैसला पूरी तरह से बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) और खिलाड़ियों का था। लेकिन जैसे ही यह खबर हेडलाइन बनी, सरकार की ‘सुरक्षा चिंताओं’ वाली दलील कमजोर पड़ने लगी। नतीजा यह हुआ कि 24 घंटे बीतते-बीतते नजरुल को कैमरे के सामने आकर माफी मांगनी पड़ी।
24 घंटे में बदला सुर: ‘मुझसे गलती हुई’
बुधवार को नजरुल एक अलग ही अंदाज में नजर आए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “मैं अपनी बात सही ढंग से नहीं रख पाया। मैं पूरी दृढ़ता के साथ कहता हूं कि भारत न जाने का फैसला सरकार का ही था।” उन्होंने अपने पुराने बयान को ‘गलतफहमी’ करार दिया और दावा किया कि वह सिर्फ खिलाड़ियों के साहस की तारीफ कर रहे थे, न कि फैसले का श्रेय उन्हें दे रहे थे।
मुस्तफिजुर विवाद और जिद की कीमत
इस पूरे विवाद की जड़ें उस वक्त गहरी हुईं जब तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने रिलीज किया। इसके बाद बांग्लादेश ने सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत में खेलने से इनकार कर दिया। आईसीसी ने जब इंडिपेंडेंट सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देकर बांग्लादेश की मांग ठुकराई, तो बीसीबी अपनी जिद पर अड़ गया।
खिलाड़ियों का ‘बलिदान’ या मजबूरी?
स्पोर्ट्स एडवाइजर अब यह नैरेटिव सेट करने में जुटे हैं कि इस फैसले से बोर्ड को भारी वित्तीय नुकसान हुआ और खिलाड़ियों पर बैन का खतरा भी था। बावजूद इसके, खिलाड़ियों ने ‘राष्ट्रीय गरिमा’ के लिए इसे स्वीकार किया। नजरुल के मुताबिक जनवरी की शुरुआत में ही सरकार ने तय कर लिया था कि टीम इंडिया की सरजमीं पर कदम नहीं रखेगी।
हालांकि जानकारों का मानना है कि नजरुल का यू-टर्न यह दर्शाता है कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी पकड़ खो रही है। स्कॉटलैंड ने पहले ही बांग्लादेश की जगह वर्ल्ड कप में एंट्री ले ली है, लेकिन ढाका में अब भी चर्चा इस बात की है कि क्या ‘सुरक्षा’ वाकई मुद्दा था या यह सिर्फ एक राजनीतिक ईगो की लड़ाई थी।
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