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कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस पर बड़ा झटका: क्या है पूरा मामला?
बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस की कैशलेस सुविधा बंद कर दी है। इसको लेकर एएचपीआई ने पुरानी दरों और देरी से भुगतान का हवाला दिया है जिससे अब मरीजों को जेब से खर्च करना पड़ेगा और इसके बाद रिइंबर्समेंट की लंबी प्रक्रिया से सभी को गुजरना होगा।
- 1 सितंबर 2025 से बजाज आलियांज, केयर हेल्थ ने कैशलेस सुविधा बंद की।
- एएचपीआई ने पुरानी दरों, देरी से भुगतान के चलते फैसला लिया।
- जीआईसी ने फैसले को मनमाना बताकर भरोसा कम होने की चेतावनी दी।
- मरीजों को जेब से खर्च, रिइंबर्समेंट की लंबी प्रक्रिया का सामना।
- बीमा कंपनियां और जीआईसी एएचपीआई से बातचीत कर समाधान तलाश रहे।
नई दिल्ली. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीधारकों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस और केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने 1 सितंबर 2025 से कैशलेस अस्पताल सुविधा बंद करने का फैसला लिया है. इस फैसले ने आम लोगों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अब इलाज के लिए जेब से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है.

जीआईसी ने जताई आपत्ति
क्यों लिया गया ये फैसला?
यह विवाद एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स-इंडिया (एएचपीआई) की 22 अगस्त की घोषणा से शुरू हुआ. एएचपीआई ने उत्तर भारत के अपने सदस्य अस्पतालों को सलाह दी थी कि वे बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस के पॉलिसीधारकों के लिए कैशलेस सुविधा बंद कर दें. इसके पीछे कारण बताया गया कि पुरानी रिइंबर्समेंट दरें, देरी से भुगतान, एकतरफा कटौती और लंबी प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं. साथ ही, बढ़ती दवाओं और इलाज की लागत ने अस्पतालों के लिए मौजूदा शर्तों में काम करना मुश्किल कर दिया है.
पॉलिसीधारकों पर क्या असर?
कैशलेस सुविधा बंद होने से मरीजों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से पैसे देने पड़ सकते हैं. बाद में रिइंबर्समेंट के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा. इससे खासकर उन परिवारों पर असर पड़ेगा जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिन्हें तुरंत इलाज की जरूरत है.
क्या है बीमा कंपनियों का रुख?
बजाज आलियांज ने कहा कि वह हमेशा पॉलिसीधारकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है. कंपनी ने एएचपीआई के साथ बातचीत कर इस मामले को सुलझाने की बात कही है. जीआईसी ने भी एएचपीआई से अपील की है कि वह अपना फैसला वापस ले और बीमा कंपनियों के साथ मिलकर इस समस्या का हल निकाले.
लेखक के बारे में

न्यूज़ लिखना इतना आसान भी नहीं है जितना उनको पढ़ना होता है। हर खबर की गहराई में जाकर एक निचोड़ निकलना और सटीकता के साथ आप तक पहुंचाने का काम पिछले 8 सालों से कर रहा हूँ। कृषि से स्नातक करने के बाद से ही कृषि विषय पर आर्टिकल लिखने शुरू किये थे लेकिन समय पंख लगाकर कब तेजी से निकला और कब 8 साल बीत गए इसका भान ही नहीं हुआ। आगे भी समय के साथ पंख लगाकार आके लिए ऐसे ही आर्टिकल लिखते रहेंगे।