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भारत की पहली बुलेट ट्रेन: इस दिन से दौड़ेगी अपनी रफ़्तार के साथ
बुलेट ट्रेन ठाणे, सूरत, वडोदरा, वापी, बिलिमोरा, नाडियाड-आनंद और अहमदाबाद जैसे शहरों को जोड़ेगी. 320 किमी/घंटे तक की रफ्तार वाली E10 शिंकानसेन ट्रेनें न सिर्फ समय बचाएंगी बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प होंगी.

भारत में जल्द ही रफ्तार का नया इतिहास रचा जाएगा. अहमदाबाद और मुंबई के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन 2027 में दौड़ने को तैयार है. यह ट्रेन 508 किलोमीटर की दूरी को सिर्फ 2 घंटे में तय करेगी, वो भी 308 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से. जापान की अत्याधुनिक E10 शिंकानसेन तकनीक से लैस यह ट्रेन भारत में रेल यात्रा को नया आयाम देगी.
शिंकानसेन: जापान की तकनीकी क्रांति
इस चुनौती का हल निकालने के लिए इंजीनियर तादात्सी मदसुदैरा ने कमाल कर दिखाया. उन्होंने एक खास एयर स्प्रिंग सिस्टम बनाया, जो ट्रेन की स्थिरता को बढ़ाता था. 1963 में इस तकनीक ने 256 किमी/घंटे की रिकॉर्ड स्पीड हासिल की और शिंकानसेन को दुनिया की सबसे भरोसेमंद हाई-स्पीड ट्रेनों में से एक बनाया.
भूकंप में भी बेपटरी नहीं होगी ट्रेन
जापान में भूकंप आम हैं फिर भी शिंकानसेन का सुरक्षा रिकॉर्ड बेदाग है. इसका राज है URDAS (अर्जेंट अर्थक्वेक डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम) जो भूकंप के कुछ सेकंड पहले ही ट्रेन को रोक देता है. भारत की बुलेट ट्रेन में भी ऐसे ही एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम होंगे, जो इसे भूकंप या अन्य आपदाओं में सुरक्षित रखेंगे.
मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर की खासियत
यह बुलेट ट्रेन ठाणे, सूरत, वडोदरा, वापी, बिलिमोरा, नाडियाड-आनंद और अहमदाबाद जैसे शहरों को जोड़ेगी. 320 किमी/घंटे तक की रफ्तार वाली E10 शिंकानसेन ट्रेनें न सिर्फ समय बचाएंगी बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प होंगी. 2030 तक भारत और जापान में इन ट्रेनों का संचालन एक साथ शुरू होने की उम्मीद है.
यह प्रोजेक्ट भारत में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक सफर का अनुभव देगा. यह न सिर्फ दो शहरों को जोड़ेगा, बल्कि भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक भी बनेगा.
लेखक के बारे में

न्यूज़ लिखना इतना आसान भी नहीं है जितना उनको पढ़ना होता है। हर खबर की गहराई में जाकर एक निचोड़ निकलना और सटीकता के साथ आप तक पहुंचाने का काम पिछले 8 सालों से कर रहा हूँ। कृषि से स्नातक करने के बाद से ही कृषि विषय पर आर्टिकल लिखने शुरू किये थे लेकिन समय पंख लगाकर कब तेजी से निकला और कब 8 साल बीत गए इसका भान ही नहीं हुआ। आगे भी समय के साथ पंख लगाकार आके लिए ऐसे ही आर्टिकल लिखते रहेंगे।