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50% अमेरिकी टैक्स: भारत के इन शहरों पर मंडराया आर्थिक संकट!
अमेरिका ने 27 अगस्त 2025 से भारत के 60.2 अरब डॉलर के निर्यात पर 50% टैरिफ लगाया जिससे टेक्सटाइल, झींगा, ज्वेलरी, मशीनरी, केमिकल सेक्टर प्रभावित हो गये है। इसके अलावा तिरुपुर, सूरत, विशाखापट्टनम जैसे शहरों में नौकरियां खतरे में आ गई है।
27 अगस्त से अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया है. इससे भारत के 86.5 अरब डॉलर के निर्यात में से 60.2 अरब डॉलर का हिस्सा प्रभावित होगा. यह टैरिफ भारत के टेक्सटाइल, झींगा, ज्वेलरी, मशीनरी और केमिकल सेक्टर को झटका देगा. तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब जैसे राज्यों के शहरों पर इसका गहरा असर पड़ेगा.

सबसे ज्यादा प्रभावित शहर और सेक्टर
- तिरुपुर, सूरत, लुधियाना: ये टेक्सटाइल हब हैं. अमेरिका को 10.8 अरब डॉलर के कपड़े निर्यात होते हैं, जिनमें 35% हिस्सा अमेरिका का है. 63.9% टैरिफ से ऑर्डर घट सकते हैं, जिससे लाखों नौकरियां खतरे में हैं.
विशाखापट्टनम, कोचीन, चेन्नई: झींगा निर्यात का केंद्र. 2.4 अरब डॉलर के झींगा निर्यात पर 60% टैरिफ से भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी.
सूरत, मुंबई: जेम्स और ज्वेलरी का गढ़. 10 अरब डॉलर के निर्यात पर 52.1% टैरिफ से ऑर्डर वियतनाम, बांग्लादेश जैसे देशों की ओर जा सकते हैं.
पुणे, चेन्नई, गुरुग्राम: ऑटो और मशीनरी हब. 6.7 अरब डॉलर की मशीनरी और 2.6 अरब डॉलर के वाहनों पर 50% टैरिफ से कंपनियों पर दबाव बढ़ेगा.
हैदराबाद, अंकलेश्वर: केमिकल्स और APIs का केंद्र. 2.7 अरब डॉलर के ऑर्गेनिक केमिकल्स पर 50% से ज्यादा टैरिफ छोटे निर्माताओं के लिए मुश्किल खड़ी करेगा.
किन्हें मिली राहत?
कुछ सेक्टरों को फिलहाल टैरिफ से छूट है:
फार्मा और APIs
इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे iPhones)
कुछ ऑटो पार्ट्स और कॉपर आइटम्स
आम आदमी पर क्या असर?
नौकरियों का संकट: टेक्सटाइल, ज्वेलरी और सीफूड जैसे श्रम आधारित सेक्टरों में लाखों नौकरियां खतरे में हैं.
महंगाई की मार: डॉलर मजबूत होने से आयात महंगा होगा, जिससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं.
छोटे शहरों पर असर: तिरुपुर, सूरत, विशाखापट्टनम जैसे शहरों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका लगेगा.
क्या है समाधान?
टैक्स सुधार और बिजनेस को आसान करना: सरकार को कारोबारी नियमों को सरल करना होगा.
वित्तीय सहायता: टेक्सटाइल, झींगा और ज्वेलरी सेक्टर के लिए क्रेडिट लाइन और वेतन सहायता जरूरी है.
नए बाजार तलाशना: यूरोप, खाड़ी देशों और पूर्वी एशिया में निर्यात बढ़ाने की रणनीति अपनानी होगी.
इंसेंटिव्स बढ़ाना: RoDTEP और ROSCTL जैसे प्रोत्साहनों से कारोबारियों को राहत दी जा सकती है.
भारत के सामने चुनौती
अगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो भारत का अमेरिका को निर्यात 86.5 अरब डॉलर से घटकर 49.6 अरब डॉलर हो सकता है. यह 43% की भारी गिरावट होगी. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को नए बाजारों की तलाश और घरेलू खपत को बढ़ावा देकर इस संकट से निपटना होगा.
लेखक के बारे में

न्यूज़ लिखना इतना आसान भी नहीं है जितना उनको पढ़ना होता है। हर खबर की गहराई में जाकर एक निचोड़ निकलना और सटीकता के साथ आप तक पहुंचाने का काम पिछले 8 सालों से कर रहा हूँ। कृषि से स्नातक करने के बाद से ही कृषि विषय पर आर्टिकल लिखने शुरू किये थे लेकिन समय पंख लगाकर कब तेजी से निकला और कब 8 साल बीत गए इसका भान ही नहीं हुआ। आगे भी समय के साथ पंख लगाकार आके लिए ऐसे ही आर्टिकल लिखते रहेंगे।