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पानीपत और अंबाला पर ट्रंप के 50% टैरिफ की मार: टेक्सटाइल और साइंस इंडस्ट्री में मंडराया नुकसान का खतरा
हरियाणा के व्यपारियों के लिए ट्रंप के टैरिफ के बाद संकट उत्पन्न हो गया है। हरियाणा के अंबाला और पानीपत व्यपारियों को इस टैरिफ ने हिलाकर रख दिया है और सबकी निगाहें सरकार की तरफ से की शायद उनको कुछ राहत मिल सके -

Haryana News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50% टैरिफ के फैसले ने भारत के कई उद्योगों को हिलाकर रख दिया है। हरियाणा के पानीपत और अंबाला जैसे औद्योगिक केंद्र इसकी चपेट में आ गए हैं। पानीपत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री और अंबाला की साइंस उपकरण इंडस्ट्री पर इस टैरिफ की भारी मार पड़ रही है। स्थानीय कारोबारी चिंतित हैं क्योंकि अमेरिकी बाजार में उनके ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और नई मंडियों की तलाश एक बड़ी चुनौती बन गई है।
पानीपत में टेक्सटाइल कारोबार पर संकट
स्थानीय उद्यमी रमेश कुमार ने बताया, "अमेरिकी ग्राहक अब भारी छूट मांग रहे हैं। टैरिफ की वजह से हमारा माल वहां महंगा हो गया है। करीब 30% ऑर्डर बीच में ही रुक गए हैं।" कई कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो बड़ा नुकसान हो सकता है। कुछ निर्यातक अब यूरोप और दक्षिण अमेरिका जैसे बाजारों की ओर देख रहे हैं लेकिन वहां भी बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से कड़ी टक्कर मिल रही है।
अंबाला की साइंस इंडस्ट्री पर भी असर
अंबाला जो साइंस उपकरणों के लिए मशहूर है वहां भी हालात अच्छे नहीं हैं। यहां से हर साल करीब 4 मिलियन डॉलर (लगभग 33 करोड़ रुपये) के साइंस उपकरण अमेरिका को निर्यात किए जाते हैं। लेकिन अब कई ऑर्डर रद्द होने की कगार पर हैं। एक स्थानीय निर्माता अनिल शर्मा ने कहा, "हमारे 1,500 करोड़ रुपये के तैयार ऑर्डर पर ग्राहक अब आनाकानी कर रहे हैं। टैरिफ की वजह से हमारी कीमतें बढ़ गई हैं और अमेरिकी ग्राहक सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं।"
चीन का सस्ता माल भी अंबाला के कारोबारियों के लिए मुसीबत बन रहा है। चीनी कंपनियां बांग्लादेश में अपने दफ्तर खोलकर अमेरिकी बाजार में सस्ते साइंस उपकरण भेजने की तैयारी कर रही हैं। इससे अंबाला के छोटे और मझोले उद्यमियों को भारी नुकसान का डर सता रहा है।
कारोबारी अब नई मंडियों की तलाश में
पानीपत और अंबाला के कारोबारी अब नई मंडियों की तलाश में जुट गए हैं। यूरोप, दक्षिण अमेरिका और मध्य पूर्व के देशों को नए बाजार के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन बाजारों में जगह बनाना आसान नहीं होगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) के एक अधिकारी ने बताया, "बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों पर कम टैरिफ की वजह से वे अमेरिकी बाजार में हमसे आगे निकल रहे हैं। भारत को अब नई रणनीति बनानी होगी।"
कोविड-19 जैसे राहत पैकेज की मांग
निर्यातकों ने सरकार से कोविड-19 जैसे राहत पैकेज की मांग की है। पानीपत के एक कारोबारी, संजय गुप्ता ने कहा, "अगर सरकार हमें लोन मोरेटोरियम या कैश सपोर्ट दे तो कुछ राहत मिल सकती है।" भारत सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि वह निर्यातकों के लिए राहत पैकेज पर विचार कर रही है। साथ ही ऑस्ट्रेलिया, यूएई और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों को तेज करने की कोशिश की जा रही है।
ट्रंप के इस टैरिफ ने भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत जल्द ही वैकल्पिक बाजारों में अपनी पैठ नहीं बनाता तो टेक्सटाइल और साइंस इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। पानीपत और अंबाला के कारोबारी अब सरकार और अपनी मेहनत के भरोसे इस संकट से उबरने की कोशिश में हैं।
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