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सोयाबीन की फसल पर मंडराया पीला मोज़ेक वायरस का खतरा - ऐसे करें तुरंत समाधान
सोयाबीन किसानों के लिए अलर्ट! सफेद मक्खी और पीला मोज़ेक वायरस का खतरा बढ़ा। हर 3-4 दिन में फसल की जांच करें, प्रभावित पत्तियां हटाएं, पीले चिपचिपे कार्ड लगाएं। कीटनाशकों का उपयोग करें और कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें।

किसान भाइयों आप सभी के लिए इस समय की बहुत जरुरी खबर ये होने वाली है क्योंकि सभी किसानों की सोयाबीन की फसल पर इस समय सफेद मक्खी और पीला मोज़ेक वायरस का खतरा बढ़ रहा है और ऐसे में इसका इलाज करना बहुत जरुरी है। मौसम में बदलाव होने, नमी और तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण यह समस्या कई इलाकों में देखी जा रही है। कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और फसलों की नियमित जांच करने की सलाह दी है। इसके अलावा किसान भाई इसकी पहचान कैसे कर सकते है और कैसे इसका निदान किया जा सकता है इसकी भी जानकारी दी है।

कैसे पहचान करेंगे और शुरुआत में क्या करें?
रासायनिक उपाय भी कर सकते है
किसान अगर आपकी फसल में सफ़ेद मक्खी का प्रकोप बढ़ रहा है तो आपको तुरंत प्रभाव से कृषि विभाग द्वारा सुझाए गए कीटनाशकों का उपयोग करें। देखिये यहां डिटेल दी गई है -
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एसिटामिप्रिड 25% + बिफेंथ्रिन 25% WG: 250 ग्राम को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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अधिक प्रकोप होने पर:
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डायनोटेफ्यूरान 20% SG: 150 ग्राम प्रति हेक्टेयर
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बुप्रोफेज़िन 25% SC: 1 लीटर प्रति हेक्टेयर
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थायोमेथोक्साम 25% WG: 100 ग्राम प्रति हेक्टेयर
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आपको अपनी फसल में छिड़काव सुबह या शाम को हल्की हवा में करना है और बेहतर नतीजों के लिए आसपास के खेतों में भी एक साथ छिड़काव करें। इससे ये होगा की आसपास के खेतों में थोड़ा बहुत प्रकोप अगर होगा तो वो भी खत्म हो जायेगा नहीं तो उन खेतों से फिर से आपकी फसल में सफ़ेद मक्खी का प्रकोप होने का खतरा रहेगा।
बचाव के लिए ये जरुरी है
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बीज बोने से पहले थायमेथोक्साम 30% WS/FS से 6 मिली प्रति किलो बीज की दर से उपचार करें।
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समय पर बुवाई और फसल चक्र का पालन करें।
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खेत के आसपास खरपतवार हटाएँ, क्योंकि ये सफेद मक्खी के लिए ठिकाना बन सकते हैं।
किसानों के लिए जरुरी बात
किसान भाइयों आपके लिए सोयाबीन की फसल बहुत जरुरी होती है और इसमें अगर रोगों का प्रकोप होता है तो आपकी काफी बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। कृषि विभाग ने किसानों से अनुरोध किया है कि कीटनाशकों का उपयोग करने से पहले नजदीकी कृषि विशेषज्ञ या विस्तार अधिकारी से सलाह लें। समय पर सही कदम उठाकर किसान अपनी फसल को बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।
लेखक के बारे में

भारत कृषि प्रधान देश है और किसान देश की आत्मा है। किसानों के लिए जब कुछ किया जाता है तो मन को सुकून मिलता है। टेक्सटाइल विषय से स्नातक करने के बाद अपने लिखने के शौख को आगे बढ़ाया और किसानों के लिए कलम उठाई। रोजाना किसानों से जुडी ख़बरें और बिज़नेस से जुडी ख़बरों को लिखकर आप तक पहुंचाने का सिलसिला आगे भी ऐसे ही जारी रहने वाला है।