- Hindi News
- ब्रेकिंग न्यूज़
- ट्रंप का यूटर्न है या फिर कोई चाल : भारत पर टैरिफ हटाने के संकेत, लेकिन अब चीन पर भी नजर
ट्रंप का यूटर्न है या फिर कोई चाल : भारत पर टैरिफ हटाने के संकेत, लेकिन अब चीन पर भी नजर
ट्रंप ने कहा, भारत ने रूस से तेल खरीद 40% से घटाई, 27 अगस्त का 25% टैरिफ हट सकता है। भारत ने रूस से 20 लाख बैरल/दिन तेल खरीदा, कुल आयात का 38%। रूस-यूक्रेन युद्ध न रुका तो टैरिफ फिर लग सकते हैं। भारत ऊर्जा सुरक्षा पर अड़ा।

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों, खासकर भारत और चीन को लेकर अपने ताजा बयान में नरम रुख दिखाया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि भारत जो रूसी तेल का करीब 40% हिस्सा खरीद रहा था अब रूस का एक बड़ा ग्राहक नहीं रहा। उन्होंने संकेत दिया कि भारत पर 27 अगस्त से लागू होने वाला 25% सेकेंडरी टैरिफ शायद हटाया जा सकता है।

हालांकि ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि अगर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे मास्को और उसके तेल खरीदने वाले देशों पर और सख्त प्रतिबंध लगा सकते हैं। उन्होंने कहा, "दो या तीन हफ्तों में हमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों जैसे चीन पर टैरिफ लगाने के बारे में सोचना पड़ सकता है।"
भारत का रुख साफ है और रूसी तेल खरीद में बढ़ोतरी होगी
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट की बात करें तो उसके अनुसार भारत ने रूस से तेल आयात कम करने के बजाय इसे और बढ़ा दिया है। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार अगस्त में भारत ने रूस से 20 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कच्चा तेल खरीदा, जो जुलाई में 16 लाख बीपीडी था। यह भारत के कुल तेल आयात का करीब 38% है। इस दौरान भारत ने इराक और सऊदी अरब से तेल खरीद में कमी की है। इराक से आयात 9.07 लाख बीपीडी से घटकर 7.30 लाख बीपीडी और सऊदी अरब से 7 लाख बीपीडी से घटकर 5.26 लाख बीपीडी रह गया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी कंपनियों ने साफ कर दिया है कि रूसी तेल खरीदने का उनका फैसला पूरी तरह से व्यापारिक है और यह अमेरिकी दबाव से प्रभावित नहीं होगा। भारत का कहना है कि रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदने से देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं और चालू खाते का घाटा भी नियंत्रित हो रहा है।
भारत और अमेरिका के बीच तनातनी यहां से हुई शुरू
ट्रंप ने पहले भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25% टैरिफ लगाया था जो 7 अगस्त से लागू हो चुका है। इसके बाद उन्होंने 27 अगस्त से अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की थी जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। भारत ने इसे "अनुचित और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ" बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई थी। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत का तेल आयात बाजार आधारित है और इसका मकसद 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ट्रंप की नई रणनीति से क्या मतलब निकलता है
ट्रंप के ताजा बयान से लगता है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का में हुई मुलाकात के बाद उनका रुख कुछ नरम हुआ है। उन्होंने कहा कि फिलहाल रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की जरूरत नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर यूक्रेन युद्ध को लेकर स्थिति नहीं सुधरी तो वे न केवल रूस पर बल्कि उसके तेल खरीदने वाले देशों पर भी सख्त कदम उठा सकते हैं।
ट्रंप के बयान के बाद अब क्या होगा आगे?
ट्रंप के इस बयान से भारत को कुछ राहत मिल सकती है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर कोई सकारात्मक प्रगति नहीं हुई तो भारत और चीन जैसे देशों पर फिर से टैरिफ का दबाव बढ़ सकता है। भारत ने बार-बार दोहराया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देगा चाहे अमेरिका कितना भी दबाव बनाए।
लेखक के बारे में

भारत कृषि प्रधान देश है और किसान देश की आत्मा है। किसानों के लिए जब कुछ किया जाता है तो मन को सुकून मिलता है। टेक्सटाइल विषय से स्नातक करने के बाद अपने लिखने के शौख को आगे बढ़ाया और किसानों के लिए कलम उठाई। रोजाना किसानों से जुडी ख़बरें और बिज़नेस से जुडी ख़बरों को लिखकर आप तक पहुंचाने का सिलसिला आगे भी ऐसे ही जारी रहने वाला है।